Saturday, May 26, 2012

एक भौतिक विज्ञानी, एक जीव विज्ञानी और एक रसायन विज्ञानी पहली बार समुद्र किनारे सैर के लिये गये। भौतिक विज्ञानी समुद्र की ऊंची उठती हुई लहरों से बहुत प्रभावित हुआ। उसने अपने दोस्तों को कहा कि वह इन लहरों की गति का अध्ययन करना चाहता है और समुद्र में उतर गया। जैसा कि होना था, वह डूब गया और वापस नहीं आया। जीवविज्ञानी ने कहा कि वह समुद्री जन्तुओं पर कुछ रिसर्च करना चाहता है और वह भी पानी में उतर गया। भौतिक विज्ञानी की तरह वह भी डूब गया और वापस नहीं आया। रसायन शास्त्री ने काफी देर तक उन दोनों का इंतजार किया, और अंत में अपनी डायरी में अपना निरीक्षण लिखा – ”भौतिकविज्ञानी और जीवविज्ञानी, दोनों ही समुद्र के पानी में घुलनशील हैं।”

Tuesday, May 22, 2012

टीईटी मेरिट से ही मिलेंगे अच्‍छे शिक्षक टीईटी मेरिट से ही मिलेंगे अच्‍छे शिक्षक उत्‍तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी को रदृ करने की खबरों से टीईटी उतीर्ण छात्रों में रोष है। पिछली सरकार ने प्राथमिक शिक्षक के लिए 72825 पद के विज्ञापन निकाला था। लेकिन सरकार बदलते ही निर्णय बदलने की संभावना के चलते टीईटी उतीर्ण अभ्‍यर्थियोंका भविष्‍य दांव पर लग गया है। विज्ञापन में टीईटी मेरिट के आधार पर चयन की बात की गई है। जबकि इसके पूर्व प्राथमिक विद्‍यालयों में चयन का आधार एकेडमिक मेरिट था। जबकि नई सरकार टीईटी मेरिट से होने वाली चयन प्रक्रिया को बदलने की तैयारी में है। बता दें की इससे पहले भी एकेडमिक मेरिट के चयन के आधार पर प्राथमिक टीचरों की भर्ती हो चुकी है। जिसमें यूपी बोर्ड से हाईस्‍कूल इण्‍टर करने वाले छात्र सीबीएससी बोर्ड की तुलना में एकेडमिक मेरिट मे काफी पीछे रह गये।ऐसे बीएड उतीर्ण उम्‍मीद्‍वार जिनका किसी कारण से एकेडमिक मेरिट कम है। उन्‍होंने अपनी एकेडमिक मेरिट से नौकरी मिलने की संभावना छोड़ चुके थे। लेकिन शिक्षा अनिवार्य कानून के तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य होने से और टीईटी के मेरिट या फिर किसी प्रतियोगी परीक्षा के प्रदर्शन पर सरकारी टीचर बनने के लिए इन्‍होंने आवेदन किया विज्ञापन के शर्तों के मुताबिक टीईटी परीक्षा की तैयारी की और उतीर्ण हुए लेकिन जब नौकरी की बारी आई तो टीईटी में धांधली के आरोप लगने लगे। विज्ञापन को चुनौती दी गई और विज्ञापन पर रोक लग गई। इस धांधली में माध्‍यमिक शिक्षा बोर्डके कई अधिकारी घेरे में आ गये। जबकि इस परीक्षा में धांधली परिणाम निकालते समय हुई जिससे जांच द्वारा पकड़ा जा सकता है। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग से इस परीक्षा को रदृदकरने और नियम बदलने की खबरें आ रही हैं जिस पर कितनी सच्‍चाई है वह कुछ दिनों में पता चल जाएगा। लेकिन इन सब से टीईटी छात्र आहत हैं। मानसिक और शारीरिक और आर्थिक रूप से ठगे महसूस कर रहे हैं। टीईटी को रद्द करने की सजा बेरोजगारों को क्‍योंॽ बार–बार यही सवाल उठता है कि आखिरसरकार की नकामी की सजा बेरोजगारों की कब तक मिलती रहेगी। नौकरी के लिए आयोजित शिक्षा विभाग में परीक्षाएंक्‍यों भ्रष्‍टाचार के भेट चढ़ जाती हैं। इसके बाद बड़ी आसानी से परीक्षा रदृ करे अपनी जिम्‍मेदारियों से पल्‍ला झाड़ लिया जाता है। जिनको साफ सुथरी परीक्षा कराने की जिम्‍मदारी सौंपीगई वही लोगों ने टीईटी परीक्षा में धन उगाही की तो उन लोगों का नाम सामने आना चाहिए। साथ ही इस परीक्षाकी निश्‍पक्ष जांच सीबीआई से करानी चाहिए ताकी इनके पीछे के लोगों का पर्दाफाश किया जा सके। लेकिन बिना ठोस जांच के परीक्षा निरस्‍त करने से और चयन प्रक्रिया को बदलने से कुछ नहीं होने वाला बल्‍कि इन परीक्षाओं में धांधली करने वालों का मनोबल बढ़ेगा और अगली परीक्षाओं को भी प्रभावित करेंगे।

प्राथमिक शिक्षक चयन के सही नियम केलिए कमेटी बनाई जाये अगर सरकार में थोड़ी भी इच्‍छा शक्‍ति है तो टीईटी और इसके चयन पर गंभीर विचार करना चाहिए। इसके लिए रिटायर्ड जज और शिक्षाविद्‍वानों की एक कमेटी बनाई जाए और अपनी रिपोर्ट दें जिनमें निम्‍न बिंदुओंपर गौर हो कि चयन में एकेडमिक आधार से क्‍या मेधावी शिक्षक मिल पायेंगेॽ जिस तरह से सभी विवि की अलग अलग मार्किंग प्रणाली है। तो कमअंक वाला छात्र तो पीछे रह जाएगा जबकि उसने टीईटी में टाप ही किया होǃ दूसरी बात की यूपी बोर्ड और बीएड में जिस तरह से नकल हाने की खबरे अखबारों में और चैनलों में साक्षात् दिखती है। यह बातें किसी से छ्‍पिी नहीं की नकल पर रोक पाने में बोर्ड किस तरह से असमर्थ है। तीसरी बात की जब सभी आयोग चयन के लिए एक प्रतियोगी परीक्षा के मेरिट को चयन का आधार बनाते हैं तो प्राथमिक शिक्षक की भर्ती में ऐसा क्‍यों नहीं हो सकता है। चौथी बात शिक्षा की गुणवत्‍ता कैसे बढ़ाना है। हम अच्‍छी तरह से जानते है कि वर्तमान में माध्‍यमिक और उच्‍च शिक्षा में नकल माफिया का वर्चस्‍व और वास्‍तविक पढ़ाई का माहौल भी नहीं है केवल छात्रों को ज्‍यादा से ज्‍यादा अंक बटोरने की तरकीब ही सीखाई जाती है। ऐसे में केवल एकेडमिक मेरिट से हम अच्‍छे शिक्षक का चयन कर पायेंगे। हमें एक ऐ से पैमाने की जरूरत है। जो सर्वगुण संपन्‍न शिक्षकों को विद्‍यालयों में दे पायें न कि केवलदोयम दर्जे के टीचर इसीलिए चयन के आधार को आज बदलना है यानी साफ है कि सबके लिए एक ही चयन का आधार हो और वह टीईटी के मेरिट से संभव है या काई प्रतियोगी परीक्षा। बस सरकार को चाहिए की इसमें पारदर्शिता रखें और इस तरह मेधावियों का चयन होगा। जिसके परीणाम यह होगा की हमारे प्राथमिक विद्‍यालय में सर्वगुणसंपन्‍न शिक्षक मिलेंगे।

Monday, May 21, 2012

एक समाचार पत्र में छपने वाले साप्ताहिक भविष्यफल की बानगी प्रथम सप्ताह - इस हफ्ते आपके जीवन में कोई अनोखी खुशी दस्तक देने वाली है। अचानक धनप्राप्ति के भी योग बन रहे हैं। पूरा सप्ताह मौजमस्ती में गुजरेगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। द्वितीय सप्ताह - इस सप्ताह आप एक नई और अद्भुत शक्ति अपने भीतर महसूस करेंगे। वाणीपर नियंत्रण रखने से शत्रुपक्ष की पराजय सुनिश्चित है। प्रेम के मामले में भाग्यशाली रहेंगे। तृतीय सप्ताह - रोमांस के लिए यह समय आपके लिए शुभ रहेगा। इस हफ्ते कोई सुंदरी आपके जीवन में प्रवेश करने वाली है। इस सुंदरी कासानिध्य आपके लिए सफलताओं के नए द्वार खोल सकता है। चतुर्थ सप्ताह - इस समय आप स्वयं को ठगा-सा महसूस करेंगे। आपको अचानक आभास होगा कि कोई लगातार पिछले तीन सप्ताह से आपको बेवकूफ बना रहा है।

Story Update : Monday, May 21, 2012 9:23 AM केंद्र की सत्ता पर आठ साल काबिज रहने के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन का जनाधार खिसक रहा है और लोगों का झुकाव मुख्य विपक्षी दल भाजपा की ओरबढ़ रहा है। यह बात एबीपी न्यूज-निलसन के एक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में सामने आई है। संप्रग-दो 22 मई यानी मंगलवार को अपने गठन के तीन साल पूरे करने जा रहा है। इस सर्वे में सबसे चौकानें वाली बातये रही ‌कि प्रधानमंत्री पद के ल‌िएगुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी न सिर्फ सबसे पसंदीदा उम्मीदवार के तौर पर उभरे हैं, बल्कि मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को भी पीछे धकेल दिया है। राहुल से 4 फीसदी अधिक जनता की पसंद मोदी मोदी को मनमोहन सिंह के मुकाबले एक फीसदी अधिक जनता देश का अगला प्रधानमंत्री देखना चाहती है, जबकि साल 2011 में प्रधानमंत्री के सबसेपसंदीदा उम्मीदवार रहे राहुल गांधीसे भी मोदी चार फीसदी अधिक जनता की पसंद बन गए हैं। सर्वे के मुताबिक नरेंद्र मोदी को 17 फीसदी जनता देश का अगला प्रधानमंत्री देखना चाहती है, जबकि 16 फीसदी जनता की पसंद मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हैं। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को अब महज़ 13 फीसदी जनता बतौर प्रधानमंत्री देखना चाहती है।यानी जनता के बीच नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के संभावित उम्मीदवार के तौर अपनी स्थिति मजबूत की है। जनता की पसंद से उतरे मनमोहन पिछले साल के सर्वे में देश के बेहतरीन नेताओं की सूची में नरेंद्र मोदी जनता का 12 फीसदी समर्थन पाकर चौथे स्थान पर रहे थे, लेकिन इस बार 17 फीसदी का समर्थन पाकर तीन पायेदान ऊपर चढ़कर पहले स्थान पर पहुंच गए हैं। मनमोहन सिंहजो इस बार 16 फीसदी जनता का समर्थन पाकर दूसरे स्थान पर रहे हैं, पिछले साल 21 फीसदी जनता के समर्थन के साथपहले स्थान पर रहे थे। राहुल गांधी जो पिछले साल जनता का 19 फीसदी समर्थन पाकर दूसरे स्थान पर थे, इस बार उनके लोकप्रियता का ग्राफ़ काफी नीचे गिर गया है और महज़ 13 फीसदी जनता का ही समर्थन पा सके और दो पायदान नीचे खिसक कर तीसरे स्थानपर पहुंच गए हैं। सोनिया गांधी की लोकप्रियता में ग‌िरावट सर्वेक्षण में यह भी खुलासा हुआ है कि संप्रग की अध्यक्ष सोनिया गांधी की लोकप्रियता 14 फीसदी से घटकर महज नौ फीसदी तक सिमट गई है। यह सर्वेक्षण देश के 28 शहरों में अप्रैल और मई की शुरुआत में कराया गया। इसमें खुलासा हुआ है कि यदि अभी लोकसभा चुनाव हो तो भाजपा को 28फीसदी मत मिलेंगे, जबकि कांग्रेस केवल 20 फीसदी मत हासिल कर पाएगी। ज्ञात हो कि अगला आम चुनाव दो साल बाद यानी 2014 में होना है। क्या मनमोहन सरकार के कामकाज से आप खुश है? अगले प्रधानमंत्री के रूप में आप किसे देखना चाहते है?pramod pandey

१.दूसरो के साथ वह व्यवहार न करो, जो तुम्हें अपने लिए पसंद नही २.जिन्हें लम्बी जिंदगी जीनी हो, वे बिना कड़ी भुख लगे कुछ भी न खाने की आदत डालें । ३.जिसनें जीवन में स्नेह, सौजन्य का समुचित समावेश कर लिया सचमुच वह सबसे बड़ा कलाकार है । ४. विपरीत परिस्थितियो में भी जो ईमान, साहस और धैर्य को कायम रख सके,वस्तुतः वही सच्चा शूरवीर है ५. कायर मृत्यु से पूर्व अनेको बार मर चुकता है, जबकि बहादुर को मरने के दिन ही मरना पड़ता है ६. ईष्या आदमी को उसी तरह खा जाती है, जैसे कपड़ो को कीड़। ७. ईमानदार होने का अर्थ है हजार मनकों में से अलग चमकने वाला हीरा । ८. अपनी रोटी-मिल-बाँटकर खाओ ताकि तुम्हारे सभी भाई सुखी रह सके। ९. जीवन का अर्थ है'समय'जो जीवन से प्यार करते हों, वे आलस्य में समय न गवायें । १०गृहस्थ एक तपोवन है, जिसमें संयम,सेवा और सहिष्णुता की साधना करनी पड़ती है ।pramod pandey

संस्कारों और ज्ञान के ह्रास ने इस नयी पीढ़ी को उस दोराहे पर ला कर खड़ा कर दिया है जहा से उनके लिए सत्य और असत्य , मान और अपमान , ज्ञान और अज्ञान , भारतीयता और पाश्चात्य के अंतर को समझ पाना असंभव हो गया है | लड़कियों और लड़कों की जगह जगह से फटी हुयी कुल्हो से नीचे जांघो तक खिसकती हुयी जींस को आज फैशन समझा जाने लगा है , स्टेटस की बात माना जाने लगा है | किसी भी परफ्यूम , डीयो , पेस्ट , बनियान , अंडरवियर की बड़ी कम्पनी का नाम बता कर , अश्लील विज्ञापन दिखा उसके जरिये लड़की पट जाने की बात बता कर कर संस्कारों को मितियामेट किया जा रहा है || फूहड़ फिल्मे और बेहूदा गाने , संस्कृति का अपमान करते गाने देख कर गुनगुना कर हमने फिल्मकारों को आज माँ भारती पर अपमान जनक गाना गाने की इजाजत भी दे डाली है || शायद इस नयी पीढ़ी को इन सब बातो से कोई फर्क ना पड़ता हो किन्तु जिनकी रगों में आज भी सनातनी रक्त बह रहा है उनसे मेरा अनुरोध है की अब इस अश्लीलता का , इस पाश्चात्य संस्कृति का , इस गलत शिक्षा प्रणाली का विरोध करे अन्यथा हमारी धरोहर , हमारी संस्कृति , हमारी माँ भारती पर केवल विधर्मियों का कब्ज़ा होगा || जय जय सियाराम ,, जय जय माँ भारती ||